1. 'उसने कहा था' कहानी कितने भागों में बँटी हुई है? कहानी के कितने भागों में युद्ध का वर्णन है?
उत्तर - यह कहानी कुल पाँच भागों में विभाजित है। कहानी की शुरुआत अमृतसर के बाजार से होती है, जहाँ नायक और नायिका के बचपन की झलक मिलती है। इसके बाद के तीन भागों (दूसरे, तीसरे और चौथे भाग) में प्रथम विश्वयुद्ध के मोर्चे का सजीव और रोमांचक वर्णन किया गया है, जहाँ भारतीय सैनिक खंदकों में रहकर युद्ध लड़ रहे हैं।
2. कहानी के पात्रों की एक सूची तैयार करें।
उत्तर - कहानी के प्रमुख पात्र निम्नलिखित हैं:
- लहनासिंह: कहानी का मुख्य नायक, जो एक वीर सैनिक और निस्वार्थ प्रेमी है。
- सूबेदारनी: लहनासिंह के बचपन का प्रेम, जिसने अपने परिवार की रक्षा का वचन लिया था。
- सूबेदार हजारासिंह: सूबेदारनी का पति और सेना में जमादार。
- बोधासिंह: सूबेदार हजारासिंह और सूबेदारनी का पुत्र, जो युद्ध क्षेत्र में बीमार है。
- वजीरासिंह: सेना का विदूषक और लहनासिंह का घनिष्ठ मित्र, जो अंत समय में उसके पास था。
- कीरत सिंह: लहनासिंह का भाई, जिसकी याद लहना को मरते समय आती है。
3. लहनासिंह का परिचय अपने शब्दों में दें।
उत्तर - लहनासिंह एक आदर्श भारतीय सैनिक का प्रतिनिधित्व करता है। वह न केवल रणकौशल में माहिर है, बल्कि भावुक और संवेदनशील भी है। वह एक ऐसा प्रेमी है जो वासना से ऊपर उठकर कर्तव्य को प्रधानता देता है। उसकी बुद्धिमानी तब दिखती है जब वह नकली लपटन साहब को पहचान लेता है। अंततः, वह अपने प्राण देकर उस 'वचन' को पूरा करता है जो उसने सूबेदारनी को दिया था, जिससे उसका चरित्र त्याग की पराकाष्ठा बन जाता है।
4. पाठ से लहना और सूबेदारनी के संवादों को एकत्र करें।
उत्तर -
- बचपन का संवाद: अमृतसर के चौक पर लहना अक्सर उस लड़की से पूछता था— "तेरी कुड़माई (सगाई) हो गई?" और लड़की "धत्!" कहकर भाग जाती थी। एक दिन जब उसने फिर यही पूछा, तो लड़की ने चिढ़ाते हुए कहा— "कल हो गई—देखते नहीं रेशमी बूटोंवाला सालू"।
- युद्ध के समय का संवाद: जब लहना सूबेदार के घर पहुँचा, तब सूबेदारनी ने उसे याद दिलाया कि कैसे उसने बचपन में ताँगे के नीचे आने से उसकी जान बचाई थी। उसने रोते हुए कहा— "जैसे तुमने उस दिन मेरे प्राण बचाए थे, वैसे ही इन दोनों (पति और बेटे) को बचाना... यह मेरी भिक्षा है"।
5. "कल, देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू।" यह सुनते ही लहना की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर - यह सुनते ही लहनासिंह के मन में गहरा धक्का लगा और वह भावुक होकर सुध-बुध खो बैठा। वह घर लौटते समय इतना विक्षिप्त हो गया कि उसने राह में किसी को नाली में धकेल दिया, किसी के छाबड़े गिरा दिए और किसी कुत्ते को पत्थर मारा। यह प्रतिक्रिया उसके मन में उमड़े गहरे प्रेम और बिछड़ने के दुःख को दर्शाती है।
6. "जाड़ा क्या है, मौत है और निमोनिया से मरनेवालों को मुरब्बे नहीं मिला करते", वजीरासिंह के इस कथन का क्या आशय है?
उत्तर - इसका आशय है कि युद्ध के मैदान में पड़ रही कड़ाके की ठंड जानलेवा है। वजीरासिंह कहना चाहता है कि निमोनिया जैसी बीमारी से मरने वाले सैनिकों को वह शहादत का गौरव और सम्मान (भूमि के मुरब्बे) नहीं मिलता, जो युद्ध के मैदान में वीरता से लड़ते हुए वीरगति पाने वालों को प्राप्त होता है।
7. 'कहती है, तुम राजा हो, मेरे मुल्क को बचाने आए हो।' वजीरा के इस कथन में किसकी ओर संकेत है?
उत्तर - वजीरासिंह का यह संकेत फ्राँस की एक महिला (मेम) की ओर है। वह महिला भारतीय सैनिकों का बहुत आदर करती थी और उन्हें अपना रक्षक मानती थी। वह उन्हें फल और दूध जैसे उपहार देती थी और उनके पैसे लेने से मना कर देती थी।
8. लहना के गाँव में आया तुर्की मौलवी क्या कहता था?
उत्तर - तुर्की मौलवी गाँव के लोगों को बहकाता था कि जर्मनी वाले बहुत बड़े विद्वान हैं और वे वेदों से विमान चलाने की विद्या जान गए हैं। वह कहता था कि जब जर्मन आएँगे तो वे गौ-वध बंद कर देंगे। वह लोगों को डाकखाने से रुपए निकाल लेने की सलाह देता था क्योंकि उसके अनुसार अंग्रेजों का राज खत्म होने वाला है।
9. 'लहना सिंह का दायित्व बोध और उसकी बुद्धि दोनों ही स्पृहणीय हैं।' इस कथन की पुष्टि करें।
उत्तर - लहनासिंह का दायित्व बोध तब प्रकट होता है जब वह अपनी जर्सी और कंबल बीमार बोधासिंह को दे देता है और खुद ठंड में लड़ता है। उसकी तीक्ष्ण बुद्धि तब दिखाई देती है जब वह नकली लपटन साहब की सिगरेट पीने की आदत और उनके गलत भौगोलिक ज्ञान से ताड़ जाता है कि वह दुश्मन है। उसने अपनी सूझबूझ से पूरी खंदक को बम से उड़ने से बचा लिया।
10. प्रसंग एवं अभिप्राय बताएँ - 'मृत्यु के कुछ समय पहले स्मृति बहुत साफ़ हो जाती है...'
उत्तर -
- प्रसंग: यह पंक्तियाँ लहनासिंह के अंतिम क्षणों का मार्मिक वर्णन करती हैं।
- अभिप्राय: मृत्यु के करीब पहुँचने पर इंसान के जीवन की पुरानी यादें बहुत स्पष्ट हो जाती हैं। लहना को भी बचपन की 'कुड़माई' वाली बात और सूबेदारनी द्वारा माँगी गई भिक्षा पूरी तरह याद आने लगती है।
11. मर्म स्पष्ट करें -
(क) आम वाला संवाद: लहनासिंह अपनी मृत्यु के करीब है और वह अपने गाँव की यादों में खोया है। वह अपने भतीजे के साथ उसी आम के नीचे बैठकर खुशियाँ मनाना चाहता है, जिसे उसने उसके जन्म के समय लगाया था। यह उसके अपनी जड़ों के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
(ख) 'जो उसने कहा था वह मैंने कर दिया': यहाँ "उसने" शब्द सूबेदारनी के लिए है। लहना ने घायल होने के बावजूद सूबेदार और बोधा की जान बचाई और अपना वादा पूरा किया। यह वाक्य उसके बलिदान और निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा है।
12. कहानी का शीर्षक 'उसने कहा था' क्या सबसे सटीक शीर्षक है?
उत्तर - हाँ, यह शीर्षक अत्यंत सटीक और मार्मिक है। पूरी कहानी सूबेदारनी के उस एक वाक्य "इन दोनों को बचाना" (उसने कहा था) के इर्द-गिर्द घूमती है। इसी एक वाक्य को केंद्र मानकर लहनासिंह अपना सर्वोच्च बलिदान दे देता है।
13. 'उसने कहा था' कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?
उत्तर - इस कहानी का केंद्रीय भाव 'निश्चल प्रेम' और 'कर्तव्य पालन' है। यह दिखाती है कि प्रेम केवल पाने का नाम नहीं है, बल्कि त्याग और समर्पण का सर्वोच्च शिखर है, जहाँ प्रेमी अपने प्रिय के सुख के लिए अपने प्राणों की भी आहुति दे देता है।


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